Surya Ke Alfaz

  • Home
  • About us
  • Shayari
  • Social Issue
facebook twitter google plus pinterest Instagram
अंगड़ाई भी वो लेने न पाए उठा के हाथ 
देखा जो मुझ को छोड़ दिए मुस्कुरा के हाथ 


Angadai Bhi Wo Lene Na Paye Utha Ke Hath
Dekha Jo Mujhe Chhod Diye Mushkura Ke Hath

बे-साख़्ता निगाहें जो आपस में मिल गईं 
क्या मुँह पर उस ने रख लिए आँखें चुरा के हाथ 

Be-Sakhta Nigahein Jo Aapas Me Mil Gyi
Kya Muh Par Usne Rakh Liye Aankhe Chura Ke Hath

ये भी नया सितम है हिना तो लगाएँ ग़ैर 
और उस की दाद चाहें वो मुझ को दिखा के हाथ 

Ye Bhi Naya Sitam Hai Hina To Lagaye Gair
Aur Uski Daad Chahe Wo Mujhako Dikha Ke Hath

बे-इख़्तियार हो के जो मैं पाँव पर गिरा 
ठोड़ी के नीचे उस ने धरा मुस्कुरा के हाथ 

Be-ikhtiyar Hoke Jo Mai Paav Par Gira
Thodi Ke Neeche Usne Dhara Mushkura Ke Hath

गर दिल को बस में पाएँ तो नासेह तिरी सुनें 
अपनी तो मर्ग-ओ-ज़ीस्त है उस बेवफ़ा के हाथ 

Gar Dil Ko Bas Me Paye To Naseh Tiree sune
Apni To Marg-O-Jeest Hai Us Bewafa Ke Hath

वो ज़ानुओं में सीना छुपाना सिमट के हाए 
और फिर सँभालना वो दुपट्टा छुड़ा के हाथ 

Wo Januo Me Seena Chhupana Simat Ke Haye
Aur Phir Sambhalana Wo Dupatta chhuda Ke Hath

क़ासिद तिरे बयाँ से दिल ऐसा ठहर गया 
गोया किसी ने रख दिया सीने पे आ के हाथ 

Kasid Tere Bayan Se Dil Aisa Thahar Gya
Goya Kisi Ne Rakh Diya Seene Pe Aa Ke Hath

ऐ दिल कुछ और बात की रग़बत न दे मुझे 
सुननी पड़ेंगी सैकड़ों उस को लगा के हाथ 

E Dil Kuchh Aur Baat Ki Ragabat Na De Mujhe
Sunani Padegi Saikadeon Usko Laga Ke Hath

वो कुछ किसी का कह के सताना सदा मुझे 
वो खींच लेना पर्दे से अपना दिखा के हाथ 

Wo Kuchh Kisi Ka KAh Ke Satana Sada Mujhe
Wo Kheench Lena Parde Se Apna Dikha Ke Hath

देखा जो कुछ रुका मुझे तो किस तपाक से 
गर्दन में मेरी डाल दिए आप आ के हाथ 

Dekha Jo Kuchh Ruka Mujhe To Kis Tapak Se
Gardan Me Meri Daal Diye Aap Aa Ke Hath


फिर क्यूँ न चाक हो जो हैं ज़ोर-आज़माइयाँ 
बाँधूंगा फिर दुपट्टा से उस बे-ख़ता के हाथ 

Phir Kyon Na Chak Ho Jo Hai Jor Aajmaiya
Bandhunga Phir Dupatta Se Us Bekhata Ke Hath

कूचे से तेरे उट्ठें तो फिर जाएँ हम कहाँ 
बैठे हैं याँ तो दोनों जहाँ से उठा के हाथ 

Kuche Se Tere Uthe To Phir Jayein Ham Kahan
Baithe Hai Ya To Dono Jahan Se Utha Ke Hath

पहचाना फिर तो क्या ही नदामत हुई उन्हें 
पंडित समझ के मुझ को और अपना दिखा के हाथ 

Pahachana Phir To Kya Nadamat Hui Unhe
Pandit Samajh Ke Mujhko Aur Sapana Dikha Ke Hath

देना वो उस का साग़र-ए-मय याद है 'निज़ाम' 
मुँह फेर कर उधर को इधर को बढ़ा के हाथ 

Dena Wo Us Ka Sagar E May Yaad Hai " Nizam"
Muh Pher Kar Udhar Ko Idhar Ko Badha Ke Hath


By : "Nizam Rampuri"

0
Share

1. Love Poem in hindi

Love +Poem +hindi
Love +Poem +hindi

वो लोग बहुत खुशकिस्‍मत थे
जो इश्‍क को काम समझते थे
या काम से आशिकी रखते थे
हम जीते जी नाकाम रहे
ना इश्‍क किया ना काम किया
काम इश्‍क में आड़े आता रहा
और इश्‍क से काम उलझता रहा
फिर आखिर तंग आकर हमने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया 






2. Love Poem in Hindi


हाथ में हाथ की हो हरारत तो इश्क़ बनता है
मौजूद हो दरमियाँ शरारत तो इश्क़ बनता है
आग उधर भी लगी हो और तुम भी सुलगो
इश्क़ को इश्क़ की हो आदत तो इश्क़ बनता है
गवाह हों सिलवटें जब शब् के कश्मकश की
न मिले कहीं भी राहत तो इश्क़ बनता है
फ़र्क़ कुछ न रहे महबूब और खुदा में तेरे
जब करो उसकी इबादत तो इश्क़ बनता है
शिद्दत की इंतिहां इस कदर होनी चाहिए
जैसे प्यासे को पानी की हो चाहत तो इश्क़ बनता है
नज़र झुकी हो और लब भी जब करीब आ जाएं
फिर भी देखो उसकी इजाज़त तो इश्क़ बनता है

3. Love Poem in hindi

जिस तरह बे मौसम बारिश सूखे पत्तों पे आवाज़ करती है,
तुम आजकल बिन बोले मुझसे इस तरह बात करती हो,
ना पता है तुमको मेरी परेशानी का ना ही मेरे दिल की हालत का,
मैं ऐसा क्यों हो रहा हूँ यह सवाल भी नहीं करती हो,
तुम्हें फ़िक्र रह गयी है अपनी और शायद सिर्फ़ अपनी,
क्यों नहीं इस रिश्ते से निकल कर पहली सी मुलाक़ात करती हो,
बहुत दिन हो गये मुझको दोपहर की नींद से जगाए,
क्यों नहीं मेरे कानो में आकर कोई शरारत वाली बात करती हो,
एक वक़्त था जब हम तुम थे सुख दुख के साथी,
क्यों नहीं तुम मुझको समझा कर एक नयी शुरुआत करती हो,
सूखे पत्तों की खरखराहट सी तुम मुझसे बात करती हो,
मैं बहुत उदास हो जाता हूँ जब तुम मुझसे इस तरह बात करती हो

4. Love Poem in Hindi

उसका हाथ ,अपने हाथ में लेते हुए मैंने सोचा
दुनिया को, हाथ की तरह गर्म और सुंदर होना चाहिए.

5. Love Poem in Hindi

दिल चाहता है ज़माने से छुपा लूँ तुझको,
दिल की धड़कन की तरह दिल में बसा लूँ तुझ को,
कोई एहसास जुदाई का न रह पाये,
इस तरह खुद में मेरी जान छुपा लूँ तुझको,
तू जो रूठ जाये मुझ से मेरे दिल के मालिक,
सारी दुनिया से खफा हो कर मना लूँ तुझको,
जब मैं देखूं तेरे चेहरे पे उदासी का समा,
बस यह चाहूँ किसी तरह हंसा लूँ तुझको,
तू कभी जब दुनिया से बेज़ार हो जाये ,
दिल यह चाहे की बाहों में छुपा लूं तुझ को

6. Love Poem in Hindi

Love +Poem +hindi 1
Love +Poem +hindi

दूर दूर रह कर भी हम कितने करीब हैं,
हमारा रिश्ता भी जाने कितना अजीब है,
बिन देखे ही तेरा यूँ मोहब्बत करना मुझसे,
बस तेरी यही चाहत ही तो मेरा नसीब है,
पर जिसे प्यार ही ना मिला हो किसी का,
वो बदकिस्मत भी यहाँ कितना गरीब है,
और जिसे मिल गया हो तेरे जैसा यार यहाँ,
वो शख्स भी मेरे जैसा ही खुशनसीब है.






7. Love Poem in Hindi

जिसने भी की मुहब्बत, रोया जरूर होगा।
वो याद में किसी के खोया जरूर होगा।
दिवार के सहारे, घुटनों में सिर छिपाकर ,
वो ख्याल में किसी के खोया जरुर होगा।
आँखों में आंसुओ के, आने के बाद उसने,
धीरे से उसको उसने, पोंछा जरुर होगा।
जिसने भी की मुहब्बत, रोया जरूर होगा।

8. Love Poem in Hindi (By Dr. Kumar Vishwas)

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नहीं सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नहीं सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नहीं पाया, वो तेरा हो नहीं सकता !!

9. Love Poem in Hindi

तुझ पर ही मरते रहे हैं हम,
और तुझको ही अपना बनाना हैं
जानता हूँ रंग होते हैं ख़ुशी बिखेरने के लिए,
पर मुझे तेरी सादगी का रंग ही लगाना हैं !!
कटती नही ये अँधेरी सर्द रात,
सुबह होते ही चाँद को भी जगाना हैं
तू कहे तो सुबह को शाम कर दूँ मैं,
पर याद रखना तेरा भी कोई दीवाना हैं!!
दोस्त बैठे है महफ़िल में लोगो की तरह,
तेरा साथ न होना तो बस एक बहाना है
छुप जाता हूँ मैं रोज तुझे देखकर,
मेरा बचपना नही, ये प्यार में शरमाना हैं !!
लोग मिलते हैं बिछड़ते हैं लोगों की तरह,
तुझे पाकर अपनी किस्मत को बताना है
कि ये तेरा आशिक़ कोई नया नही हैं,
ये पागल तो जमाने से भी पुराना हैं !!

10. Love Poem in Hindi

आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें                                                                                                                      हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं

11. Love Poem in Hindi

आते आते मिरा नाम सा रह गया                                                                                                                              उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया

12. Love Poem in Hindi

मुझको जब ऐसे देखती हो तुम,
कसमसाती है आरजू दिल में
ज़ादू भरी आँखों वाली सुनों
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो
फिर मैं कोई उम्मीद करूँ
फिर मुझे कोई अरमां हो
तुम शायद मेरी बन जाओ
फिर दिल को ऐसा गुमाँ हो
पर ऐसा ना हो तो अच्छा हैं
इन बातों में क्या रक्खा हैं.
मुझ को ऐसी उम्मीद ना दो
ज़ादू भरी आँखों वाली सुनों
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो
फिर धड़कन में तुम बस जाओ
फ़िर कोई गजल मैं गाऊं
फिर चाँद में तुमको मैं देखूँ
फूलों में तुमको पाऊं
पर ऐसा ना हो तो अच्छा हैं
इसका अंजाम जो होता हैं
वो दर्द ही देता है दिल को
ज़ादू भरी आँखों वाली सुनों
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो

13. Love Poem in Hindi

कागज की नाव बही और डूब गई
बात डूबने की नहीं ,उसके हौसले की है
और कौन मरा कितना जिया ,सवाल ये नहीं
बात तो हौसले की है , बात तो जीने की है
कितना जिया ये बात बेमानी है ,किस तरह जिया
कागज़ी नाव का हौसला देखिये , डूबना नहीं।

14. Love Poem in Hindi

ऊँचे नील गगन के वासी, अनजाने पहन पाहुन मधुमासी,
बादल के संग जाने वाले, पंछी रे, दो पर दे देना !
सीमाओं में बंदी हम, अधरों पीते पीड़ा का तम:
तुम उजियारे के पंथी, मेरी अंधियारी राह अगम!
बांहों पर मोती बिखराए, आँखों पर किरणें छितराए,
ऊषा के संग आने वाले , पंछी रे, दो पर दे देना !
तुमसे तो बंधन अनजाने, तुम्हें कौन-से देस बिराने?
मैं बढूं जिधर उधर झेलूं अवरोधक जाने पहचाने|
अधरों पर मधुबोल संजोये, पावनता में प्राण भिगोये,
मुक्ति-गान सुनाने वाले , पंछी रे, दो पर दे देना !

15. फूलों पे जान दी कभी कांटों पे मर लिये                                                                                                                    दो दिन की ज़िन्दगी में कई काम कर लिये

0
Share
देश की आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान को लागू किया गया इस संविधान के निर्माण में 296 संविधान सभा के सदस्य थे जिसमें नेहरू, पटेल, राजेंद्र प्रसाद ,सरोजिनी नायडू, अंबेडकर और सैकड़ों लोग थे 11 महीने 18 दिन में इस संविधान का निर्माण किया गया लेकिन 11 महीने 18 दिन में कुल 166 घंटे काम करके इस संविधान को बनाया गया
हमारे संविधान में कुल 395 आर्टिकल है लेकिन पिछले 72 वर्षों में करीब 98 से ज्यादा संशोधन हो चुके हैं
साफ शब्दों में कहें तो जिस संविधान में 395 आर्टिकल है उसमें 98 संशोधन का मतलब वह संविधान पुराना रह ही नहीं गया जिससे साफ संकेत मिलता है कि संविधान में साइक्लो कमियां थी जिन्हें आवश्यकता अनुसार समय-समय पर दूर किया गया


डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म 9891 में मध्यप्रदेश में हुआ था डॉक्टर अंबेडकर को उनके उच्च शिक्षा के लिए काफी सम्मान किया जाता है और सम्मान के दृष्टि से देखा जाता है लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का देश की आजादी में योगदान ना के बराबर था एक ऐसा व्यक्ति जो विदेशों से पढ़कर बैरिस्टर बना था उस व्यक्ति ने अपने कुंठित भावना और द्वेष के कारण देश की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे जेलों में बंद भारतीयों का कोई केस नहीं लड़ा ।
यह हैरान करने वाली बात है कि कोई व्यक्ति जिसे इतिहास में इतना महत्व दिया जाता है वह व्यक्ति कुंठित मानसिकता और स्वर्ण विरोध की वजह से देश के महान वीरो का किस तक नहीं लड़ा जिन्होंने इस देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया ।
जब देश को जरूरत थी ऐसे बारिश टर्की उस समय डॉक्टर अंबेडकर ने हिंदुस्तान को ही बांटने की कोशिश की और काफी हद तक को हिंदुओं को दो भाग में बांटने में कामयाब हो गए ।
बहुत कम लोगों को यह जानकारी होगी कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर हिंदुस्तान का बंटवारा तीन भागों में चाहते थे हिंदुओं के लिए हिंदुस्तान मुसलमानों के लिए पाकिस्तान और तथाकथित दलितों के लिए चर्मिस्तान ।
लेकिन जब डॉक्टर अंबेडकर को संविधान निर्माता का ऑफर दिया गया तो वह इस बात पर राजी हो गए कि देश का बंटवारा केवल दो भागों में ही होगा ।
एक कुंठित मानसिकता का व्यक्ति जिसे ब्राह्मण समाज से इतनी नफरत थी कि उसने आजादी के बाद से तथाकथित झूठे ब्राह्मणवाद का भ्रम फैला कर समाज को बांटने का काम किया ।
देश की आजादी मैं अगर योगदान की बात की जाए तो सबसे पहले आजादी की लड़ाई का बिगुल मंगल पांडे ने फूंका था ।
डॉक्टर अंबेडकर ने शुरू से ही 1 विशेष वर्ग का प्रतिनिधित्व किया वह हमेशा से इस पक्ष में थे की दलितों को देश में ज्यादा मौका मिले क्योंकि दलितों पर उनके अनुसार काफी अत्याचार हुए हैं ।
जब देश पर मुगलों का राज था तब हर एक जाति का व्यक्ति मुगलों का गुलाम था चाहे वह दलित हो हिंदू हो सिख हो मुसलमान हो उसके बाद जब देश पर अंग्रेजों ने राज किया तभी भी भारत के हर एक जाति वर्ग का व्यक्ति अंग्रेजों का गुलाम था ।
लेकिन कुछ तथाकथित मूर्ख कहते हैं कि ब्राह्मणों ने दलितों पर काफी अत्याचार किए और वह यह भूल जाते हैं कि उस समय मुगलों के बाद अंग्रेजों के गुलाम सभी थे तो फिर इन तथाकथित दलितों पर अत्याचार कब हुए किसने की ।
बहुत सारी किताबों में आने को कहानियां सुनने को मिलती है कि दलितों को कुएं से पानी पीने के लिए रोका जाता था और भीमराव अंबेडकर को भी कई बार रोका गया था
लेकिन सोचने वाली बात यह है कि जब कुंठित मानसिकता वाले व्यक्ति को पानी पीने कोई नहीं मिला तो वह इतने वर्षों तक जीवित कैसे रह गया उसे तो पानी के बिना तड़प तड़प कर मर जाना चाहिए था
ऐसी अनेकों बातें हैं लेकिन आज देश में जिस तरह से एक विशेष वर्ग के लोगों को शोषित के रूप में पेश किया जाता है वह वर्तमान समय के सबसे बड़े शोषक है ।
देश की आजादी के समय ब्राह्मणों की जनसंख्या कुल आबादी का करीब 19% था लेकिन आज यह करीब 5% पर आ कर रुक गया है ।
लेकिन शोषित समाज कौन है तथाकथित दलित जो व्यक्ति दलित का मतलब ही नहीं जानता है वह दलित दलित चलाता है दलित कोई विशेष जाति नहीं होती दलित का मतलब होता है समाज का हर व्यक्ति जो आर्थिक रूप से सामाजिक रूप से शिक्षा के दृष्टि से पिछड़ा है जिसका सामाजिक शोषण हुआ है हर व्यक्ति दलित है लेकिन अंबेडकर की कुंठित मानसिकता में सबसे ज्यादा ब्राह्मण समाज का शोषण किया है ।
आज देश का प्रधानमंत्री यह कहता है कि हम तो बाबा साहब की वजह से प्रधानमंत्री बन पाए हैं ।
वक्त घर में छुप कर बैठने का नहीं है अपने हक की लड़ाई लड़ने का है अपने हक के लिए अपने घरों से निकलने का है ।
अगर हम एक अच्छा समृद्ध हिंदुस्तान की कल्पना करते हैं तो हमें इस संविधान को ही जला देना चाहिए जैसा कि हिंदू विरोधी डॉक्टर अंबेडकर ने 1953 में कही थी ।
हमारा संविधान एक ग्रंथ के जैसा है इसमें करीब 395 आर्टिकल्स है जो कि 1935 में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट से नकल किया गया है गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट को अंग्रेजों ने भारत की समृद्ध के लिए नहीं बल्कि भारत को गुलाम बनाने के लिए किया था और उसी को नकल करके लिखने में 11 महीने 18 दिन गुजर गए , ऐसे महान ज्ञानी थे डॉ आंबेडकर जिन्हें नकल करके लिखने में 11 महीने लग जाते हैं ।
डॉक्टर अंबेडकर पूरी जिंदगी कन्फ्यूजन में ही थे कभी वह मुसलमान बनना चाहते थे कभी वह खुद को दलित कहते थे कभी वे बौद्ध धर्म को अपनाते थे, और अंत समय में ऐसे नकल किए गए संविधान को हिंदुस्तान की जनता पर थोप दिया जिसको भारत पर राज करने के मकसद से बनाया गया था । उसमें उनका भी कुछ स्वार्थ था क्योंकि जो व्यक्ति देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले महान योद्धाओं का केस नहीं लड़ सकता जो व्यक्ति आजादी के समय जिस वक्त हमें एकता की जरूरत थी उस वक्त हिंदुस्तान को ही जाति के नाम पर बांट दिया ऐसे व्यक्ति को भारत रत्न दिया गया, ऐसे कुंठित मानसिकता वाले व्यक्ति को संविधान निर्माता बनाया गया और ऐसे कुंठित मानसिकता वाले व्यक्ति के नाम पर आज के राजनेता वोट बैंक की राजनीति करते हैं ।
आज हिंदुस्तान पिछड़ा है तो इसका एक बहुत बड़ा कारण डॉक्टर अंबेडकर है और उनके द्वारा सौंपा गया अंग्रेजो के द्वारा बनाया गया 1935 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट है
आज दुनिया कहां से कहां पहुंच गई लेकिन भारत आज भी कितना पिछड़ा देश है और भारत केस पिछड़ेपन में सबसे बड़ा योगदान डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और उनके संविधान का है जहां पर योग्यता को नहीं विशेष वर्ग को मौका मिलता है ।
आज देश की युवा पीढ़ी पढ़ाई करने के बाद विदेश चली जाती है क्योंकि वहां पर उनकी योग्यता को महत्व दिया जाता है ।
आज इतिहास में भले ही डॉक्टर अंबेडकर को एक महापुरुष की संज्ञा दी जाती है लेकिन इस कुंठित मानसिकता वाले व्यक्ति ने हिंदुस्तान को काफी पीछे धकेल दिया ।
इस हिंदुस्तान को सोने की चिड़िया कहा जाता था उसे तो अंग्रेजों ने लूट लिया लेकिन जो हिंदुस्तान लूटे जाने के बाद सोने की चिड़िया कैसे बन सकता था उसे डॉक्टर अंबेडकर और उनके संविधान ने कनखजूरा बना कर छोड़ दिया ।
देश के सुनहरे भविष्य और भारत की दुनिया में एक अलग और महान छवि के लिए सबसे पहले इस अंग्रेजो के द्वारा बनाए गए 1935 गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट को तथाकथित भारत के संविधान को सबसे पहले बदलना होगा ।
अंत में बस इतना ही की अंबेडकर का विरोध हम इसलिए नहीं कर रहे हैं कि वह एक अलग समाज एक विशेष समाज से है बल्कि इसलिए हो रहा है कि उन्होंने संविधान पर आते समय एक विशेष वर्ग का ही बस ध्यान रखा जो कि उनकी कुंठित मानसिकता को दर्शाता है ।
0
Share
Home
Cheap Reseller hosting

Twitter

Tweets by SuryaKeAlfaz
Copyright © 2019 Surya Ke Alfaz

Created By ThemeXpose